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इन 5 कारणों से लोगों को होता है सà¥à¤•िन अलà¥à¤¸à¤° (तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर छाले), जानें इसके लकà¥à¤·à¤£ और बचाव के उपाय
सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ कà¥à¤› सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में सà¥à¤•िन अलà¥à¤¸à¤° (Skin ulcers) होने का खतरा जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है। आइठजानते हैं इनका कारण और बचाव के उपाय।Â
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सà¥à¤•िन अलà¥à¤¸à¤° (तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर छाले) का कारण-Skin ulcers causes
1. धमनी के छाले (Arterial ulcers)
आरà¥à¤Ÿà¤°à¥€à¤¯à¤² अलà¥à¤¸à¤° सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• या इसà¥à¤•ेमिक अलà¥à¤¸à¤° आरà¥à¤Ÿà¤°à¥€ आपके शरीर के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र बà¥à¤²à¤¡ सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤Ÿ नहीं कर पाती है। इसके कारण टिशूज मर जाते हैं इनमें अलà¥à¤¸à¤° हो जाता है। ये डायबिटीज, पेरिफेरल आरà¥à¤Ÿà¤°à¥€à¤œ डिजीज के कारण होता है। साथ ही जो लोग मोटापे से पीड़ित होते हैं उनमें à¤à¥€ ये समसà¥à¤¯à¤¾ होती है।Â
2. नà¥à¤¯à¥‚रोपैथिक सà¥à¤•िन अलà¥à¤¸à¤° (Neuropathic Skin Ulcers)
डायबिटीज à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ बीमारी है जो हाई बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र के कारण होती है। समय के साथ, हाई बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र का रहने से नà¥à¤¯à¥‚रोपैथी नामक तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा कà¥à¤·à¤¤à¤¿ हो सकती है। आप अपने पैरों और पैरों में सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ खो सकते हैं और आपके पैरों में अलà¥à¤¸à¤° (Leg Ulcer) हो सकता है। दरअसल, डायबिटीज में जब आपको चोट लगती है तो हाई बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र घाव के à¤à¤°à¤¨à¥‡ को धीमा कर देती है। à¤à¤¸à¥‡ में तà¥à¤µà¤šà¤¾ की ये चोटें अलà¥à¤¸à¤° में बदल सकती हैं। इसे नà¥à¤¯à¥‚रोपैथिक सà¥à¤•िन अलà¥à¤¸à¤° (Neuropathic Skin Ulcers)कहा जाता है।Â
3. खराब बà¥à¤²à¤¡ सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨ और वैसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिजीज (Poor blood Circulation)
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ टाइट कपड़े और खराब फिटिंग वाले जूते पहने से आपका बà¥à¤²à¤¡ सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨ खराब होता जाता है और यही सà¥à¤•िन अलà¥à¤¸à¤° का कारण बनता है। इसके अलावा धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ अलà¥à¤¸à¤° के लिठआपके जोखिम को à¤à¥€ बढ़ा सकता है। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठहै कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह नसों और रकà¥à¤¤ वाहिकाओं को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाता है।Â
4. डीकà¥à¤¯à¥‚बिटस अलà¥à¤¸à¤° या पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के कारण होने वाला अलà¥à¤¸à¤° (Decubitus Ulcers)
डीकà¥à¤¯à¥‚बिटस अलà¥à¤¸à¤°, जिसे पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° अलà¥à¤¸à¤° à¤à¥€ कहा जाता है, तब बनते हैं जब तà¥à¤µà¤šà¤¾ के किसी विशेष कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर लंबे समय तक दबाव बना रहता है। यह रकà¥à¤¤ वाहिकाओं को संकà¥à¤šà¤¿à¤¤ करता है, कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में सामानà¥à¤¯ बà¥à¤²à¤¡ सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨ को बाधित करता है और तà¥à¤µà¤šà¤¾ को तोड़ने का कारण बनता है। इस पà¥à¤°à¤•ार के अलà¥à¤¸à¤° अकà¥à¤¸à¤° हडà¥à¤¡à¥€ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ के आसपास विकसित होते हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि तà¥à¤µà¤šà¤¾ को कà¥à¤¶à¤¨ करने के लिठवहां कम वसा होती है। आप उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अकà¥à¤¸à¤° कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚, कोहनी, पीठ, टेलबोन के आसपास और टखनों और à¤à¤¡à¤¼à¥€ के आसपास पाà¤à¤‚गे। ये अलà¥à¤¸à¤¸ अकà¥à¤¸à¤° उन बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है जो बिसà¥à¤¤à¤° या वà¥à¤¹à¥€à¤² चेयर तक ही सीमित रहते हैं या फिर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चल नहीं पाते।
5. फंगल, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² और वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ (Fungal, bacterial and Viral Infection)
फंगल, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² और वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के कारण जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° लोगों को सà¥à¤•िन अलà¥à¤¸à¤° होते हैं। दरअसल, फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ तब होता है, जब तà¥à¤µà¤šà¤¾ में नमी लंबे समय तक जमा रहती है और फंगस पनपते हैं और बढ़ने लगते हैं। नमी के लंबे समय तक संपरà¥à¤• में रहने से तà¥à¤µà¤šà¤¾ में छाले निकल जाते हैं। इसी तरह बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ और वायरस से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ होने पर आपको फंगल, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² और वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ हो सकता है।Â
सà¥à¤•िन अलà¥à¤¸à¤° के लकà¥à¤·à¤£-Skin ulcers symptoms
तà¥à¤µà¤šà¤¾ के छाले गोल और खà¥à¤²à¥‡ घावों जैसे दिखते हैं। पर कई बार ये गंà¤à¥€à¤° रूप ले सकते हैं। गंà¤à¥€à¤° मामलों में, अलà¥à¤¸à¤° गहरे घाव बन सकते हैं मांसपेशियों में टीशूज से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¥‡ हà¥à¤ हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और जोड़ों तक फैल सकते हैं। जिसके साथ आपको कई लकà¥à¤·à¤£ महसूस हो सकते हैं। जैसे किÂ
-अलà¥à¤¸à¤° के आसपास सूखी या परतदार तà¥à¤µà¤šà¤¾
-खà¥à¤œà¤²à¥€
-अलà¥à¤¸à¤° के पास की तà¥à¤µà¤šà¤¾ की सूजन
-अलà¥à¤¸à¤° के पास की तà¥à¤µà¤šà¤¾ में तेज दरà¥à¤¦
-मवाद वाले घाव, जिससे दà¥à¤°à¥à¤—ंध à¤à¥€ आ सकती है।
सà¥à¤•िन अलà¥à¤¸à¤° से बचाव के उपाय-Prevention tips for skin ulcers
सà¥à¤•िन अलà¥à¤¸à¤° से बचाव का à¤à¤• तरीका ये है कि जीवनशैली में बदलाव करें, जो कि बà¥à¤²à¤¡ सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨ को बेहतर बनाà¤à¤‚, धमनियों को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखें और बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र को à¤à¥€ कंटà¥à¤°à¥‹à¤² करने में मदद करें।
1.धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ बंद करें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ टिशूज को गंà¤à¥€à¤° रूप से चोट पहà¥à¤‚चाता है और अलà¥à¤¸à¤° का कारण बनता है।Â
2. सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ आहार लें और वजन घटाà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ आहार लेने से वेट बैलेंस रहता है और शरीर पर कोई अतिरिकà¥à¤¤ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° नहीं पड़ता है।Â
3. अलà¥à¤¸à¤° से बचाव के लिठफैट का सेवन कम करना और अपने कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² को कम रखना जरूरी है।
4. रोगी को जितना हो सके वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करना चाहिà¤à¥¤ इससे आपके पैरों का बà¥à¤²à¤¡ सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨ सही रहता है। अगर वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® के दौरान रोगी को अपने पैरों में कà¥à¤› दरà¥à¤¦ महसूस होता है, तो यह सामानà¥à¤¯ है। अगर दरà¥à¤¦ अधिक सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ या गंà¤à¥€à¤° है, तो यह संकेत हो सकता है कि à¤à¤¥à¥‡à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤°à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ के कारण उसकी धमनियां गंà¤à¥€à¤° रूप से संकà¥à¤šà¤¿à¤¤ हो गई हैं। à¤à¤¸à¥‡ में अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें।Â
5. रोगी के पैरों की अचà¥à¤›à¥€ देखà¤à¤¾à¤² करें। इसके लिठसलाह ये है कि à¤à¤• जूते जो सही ढंग से फिट हों और बहà¥à¤¤ छोटे न हों उसे ही पहनें।Â
6. पैरों की चोटों से बचें। आहार चोट लग à¤à¥€ जाठतो घाव के रंग में किसी à¤à¥€ बदलाव को चेक करते रहें। इसके लिठरोजाना पैरों की जांच करें।
7. तà¥à¤µà¤šà¤¾ की कà¥à¤·à¤¤à¤¿ को रोकने के लिठतà¥à¤µà¤šà¤¾ को अचà¥à¤›à¥€ तरह से मॉइसà¥à¤šà¤°à¤¾à¤‡à¤œ करें और इनकी साफ-सफाई का खास खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखें।
8. जितना हो सके उतना सà¥à¤•िन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से बचने की कोशिश करें।Â
तो पैर के अलà¥à¤¸à¤° के उपचार के लिठà¤à¤• बड़े दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण की जरूरत होती है। सही बà¥à¤²à¤¡ सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨ रखना बेहद जरूरी है, जिसके के लिठसरà¥à¤œà¤°à¥€ की à¤à¥€ मदद लेनी पड़ सकती है। रोगी को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ जीवनशैली में बदलाव अपनाने और बनाठरखने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ किया जाना चाहिठजो वैसà¥à¤•à¥à¤² टिशूज और सेलà¥à¤¸ को हेलà¥à¤¦à¥€ रखने के लिठबेहद जरूरी है।
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