त्वचा का अल्सर कैसा दिखता है?HealthPlanet

Posted on Sat 3rd Dec 2022 : 14:54

इन 5 कारणों से लोगों को होता है स्किन अल्सर (त्वचा पर छाले), जानें इसके लक्षण और बचाव के उपाय

स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ स्थितियों में स्किन अल्सर (Skin ulcers) होने का खतरा ज्यादा होता है। आइए जानते हैं इनका कारण और बचाव के उपाय। 
 
स्किन अल्सर (त्वचा पर छाले) का कारण-Skin ulcers causes
1. धमनी के छाले (Arterial ulcers)

आर्टरीयल अल्सर स्ट्रोक या इस्केमिक अल्सर आर्टरी आपके शरीर के निचले हिस्से में ऑक्सीजन से भरपूर ब्लड सर्कुलेट नहीं कर पाती है। इसके कारण टिशूज मर जाते हैं इनमें अल्सर हो जाता है। ये डायबिटीज, पेरिफेरल आर्टरीज डिजीज के कारण होता है। साथ ही जो लोग मोटापे से पीड़ित होते हैं उनमें भी ये समस्या होती है। 
2. न्यूरोपैथिक स्किन अल्सर (Neuropathic Skin Ulcers)

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो हाई ब्लड शुगर के कारण होती है। समय के साथ, हाई ब्लड शुगर का रहने से न्यूरोपैथी नामक तंत्रिका क्षति हो सकती है। आप अपने पैरों और पैरों में स्पर्श की भावना खो सकते हैं और आपके पैरों में अल्सर (Leg Ulcer) हो सकता है। दरअसल, डायबिटीज में जब आपको चोट लगती है तो हाई ब्लड शुगर घाव के भरने को धीमा कर देती है। ऐसे में त्वचा की ये चोटें अल्सर में बदल सकती हैं। इसे न्यूरोपैथिक स्किन अल्सर (Neuropathic Skin Ulcers)कहा जाता है। 
3. खराब ब्लड सर्कुलेशन और वैस्कुलर डिजीज (Poor blood Circulation)

ज्यादा टाइट कपड़े और खराब फिटिंग वाले जूते पहने से आपका ब्लड सर्कुलेशन खराब होता जाता है और यही स्किन अल्सर का कारण बनता है। इसके अलावा धूम्रपान अल्सर के लिए आपके जोखिम को भी बढ़ा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह नसों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। 


4. डीक्यूबिटस अल्सर या प्रेशर के कारण होने वाला अल्सर (Decubitus Ulcers)

डीक्यूबिटस अल्सर, जिसे प्रेशर अल्सर भी कहा जाता है, तब बनते हैं जब त्वचा के किसी विशेष क्षेत्र पर लंबे समय तक दबाव बना रहता है। यह रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है, क्षेत्र में सामान्य ब्लड सर्कुलेशन को बाधित करता है और त्वचा को तोड़ने का कारण बनता है। इस प्रकार के अल्सर अक्सर हड्डी के क्षेत्रों के आसपास विकसित होते हैं, क्योंकि त्वचा को कुशन करने के लिए वहां कम वसा होती है। आप उन्हें अक्सर कूल्हों, कोहनी, पीठ, टेलबोन के आसपास और टखनों और एड़ी के आसपास पाएंगे। ये अल्सस अक्सर उन बुजुर्गों में ज्यादा होता है जो बिस्तर या व्हील चेयर तक ही सीमित रहते हैं या फिर ज्यादा चल नहीं पाते।
5. फंगल, बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन (Fungal, bacterial and Viral Infection)

फंगल, बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन के कारण ज्यादातर लोगों को स्किन अल्सर होते हैं। दरअसल, फंगल इंफेक्शन तब होता है, जब त्वचा में नमी लंबे समय तक जमा रहती है और फंगस पनपते हैं और बढ़ने लगते हैं। नमी के लंबे समय तक संपर्क में रहने से त्वचा में छाले निकल जाते हैं। इसी तरह बैक्टीरिया और वायरस से संक्रमित होने पर आपको फंगल, बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन हो सकता है। 
स्किन अल्सर के लक्षण-Skin ulcers symptoms

त्वचा के छाले गोल और खुले घावों जैसे दिखते हैं। पर कई बार ये गंभीर रूप ले सकते हैं। गंभीर मामलों में, अल्सर गहरे घाव बन सकते हैं मांसपेशियों में टीशूज से गुजरते हुए हड्डियों और जोड़ों तक फैल सकते हैं। जिसके साथ आपको कई लक्षण महसूस हो सकते हैं। जैसे कि 

-अल्सर के आसपास सूखी या परतदार त्वचा
-खुजली
-अल्सर के पास की त्वचा की सूजन
-अल्सर के पास की त्वचा में तेज दर्द
-मवाद वाले घाव, जिससे दुर्गंध भी आ सकती है।


स्किन अल्सर से बचाव के उपाय-Prevention tips for skin ulcers

स्किन अल्सर से बचाव का एक तरीका ये है कि जीवनशैली में बदलाव करें, जो कि ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाएं, धमनियों को स्वस्थ रखें और ब्लड शुगर को भी कंट्रोल करने में मदद करें।
1.धूम्रपान बंद करें क्योंकि धूम्रपान टिशूज को गंभीर रूप से चोट पहुंचाता है और अल्सर का कारण बनता है। 

2. स्वस्थ आहार लें और वजन घटाएं क्योंकि स्वस्थ आहार लेने से वेट बैलेंस रहता है और शरीर पर कोई अतिरिक्त प्रेशर नहीं पड़ता है। 
3. अल्सर से बचाव के लिए फैट का सेवन कम करना और अपने कोलेस्ट्रॉल को कम रखना जरूरी है।

4. रोगी को जितना हो सके व्यायाम करना चाहिए। इससे आपके पैरों का ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है। अगर व्यायाम के दौरान रोगी को अपने पैरों में कुछ दर्द महसूस होता है, तो यह सामान्य है। अगर दर्द अधिक स्पष्ट या गंभीर है, तो यह संकेत हो सकता है कि एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण उसकी धमनियां गंभीर रूप से संकुचित हो गई हैं। ऐसे में अपने डॉक्टर से बात करें। 

5. रोगी के पैरों की अच्छी देखभाल करें। इसके लिए सलाह ये है कि एक जूते जो सही ढंग से फिट हों और बहुत छोटे न हों उसे ही पहनें। 

6. पैरों की चोटों से बचें। आहार चोट लग भी जाए तो घाव के रंग में किसी भी बदलाव को चेक करते रहें। इसके लिए रोजाना पैरों की जांच करें।

7. त्वचा की क्षति को रोकने के लिए त्वचा को अच्छी तरह से मॉइस्चराइज करें और इनकी साफ-सफाई का खास ख्याल रखें।

8. जितना हो सके उतना स्किन इंफेक्शन से बचने की कोशिश करें। 

तो पैर के अल्सर के उपचार के लिए एक बड़े दृष्टिकोण की जरूरत होती है। सही ब्लड सर्कुलेशन रखना बेहद जरूरी है, जिसके के लिए सर्जरी की भी मदद लेनी पड़ सकती है। रोगी को स्वस्थ जीवनशैली में बदलाव अपनाने और बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जो वैस्कुल टिशूज और सेल्स को हेल्दी रखने के लिए बेहद जरूरी है।

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